हम इंतज़ार में है इक बावली बेचैन के

सारी रात जागते है बिना किसी चैन के

आंखे मेहताब में उसे निहारते रहते है

हम सितारा बनकर उसके चक्कर काटते

रहते है....


कभी नज़रों से उसे तलाशते रहते है

कभी धड़कनों से उसे पुकारते रहते है

ज़माने का डर इस कदर है हमें की

याद करते हुए भी वो हम भूलते रहते है


वो बाग की सबसे खूबसूरत कली 

मै उसके खुशबू में डूबा भंवर 

वो मधुशाला की मीठी मशक्कली

मै उसके चासनी में डूबा अल्हड़ कंवर


मेरा सब तुम्हारा है, तुम भी बताओ कभी

राह कब तक देखे तुम्हारा, जरा ये भी समझाओ कभी

शांत तन से, अशांत मन से याद कर रहे है तुम्हे

हमारी तरह तुम भी, यूं इश्क़ जताओ कभी

       ~अमन