हिंदी भाषा नहीं विचार है
हमारे अंदर - बाहर के ज्ञानों का समाचार है
क ख से ग.. तक का इसका संग्रह
उसमे वर्णों का मेल, जैसे अद्भुत सदाबहार है..
हिंदी गरीब गुरबा की आशा है
हिंदुस्तान की मातृभाषा है
सबको खुद में सहेजती है
पूरे ब्रह्माण्ड के ज्ञान को समेटती है..
हमारा आवाज़ हिंदी है
हमारा नाज़ हिंदी है
हमारा वतन , हमारा जतन
हमारा जुबां भी हिंदी है..
सरल, सहज, मधुर है हिंदी
हमारे मस्तिष्क का गुरुड़ है हिंदी
हमारे सपनों का चश्मे बद्दूर है हिंदी
सोच का , सपनों का शुरूर है हिंदी
हां मगर कुछ बस, हिंदी बोलना नहीं है
बस हिंदी हिंदी करके जुड़ना नहीं है
हिन्दी को शिखर तक लेे जाए कैसे
इक खुशनुमा सा सपना रह गया बस यही है..


