अच्छा चलो, हमें तुम भूल जाना

हमें अपने घर का पता ना बताना

सिकन चेहरे की, मुस्कुराते हुए छिपा लेना

ऐ यार, हमदम मेरे, मुझसे दुबारा न दिल लगाना...


क्या है हक़ीक़त, हमें मालूम नहीं

हम कब बेगैरत हुए, हमें मालूम नहीं

सालों का अफ़साना था, मेरा इश्क़ भी पुराना था

कब आशिक़ से कातिल हुए, हमें मालूम नहीं..


साथ चल तो रहा था, क्यों छोड़ दिया तुमने

मयखाने की यारी नहीं थी, क्यों तोड़ दिया तुमने

गुस्ताख़ी ऐसी क्या हुई कि रिश्ते रुखसत हो गए

हमने तो बस तुम्हारा ही सुना था, फिर क्यों दिल

 निचोड़ दिया तुमने....