हमसे ख़्वाब पूछते हो
हमारी ख्वाइशों पे सवाल पूछते हो
लफ्ज़ कुछ कह नहीं सकते तो
क्यों इशारों से सवाल पूछते हो??
वाजिब है की सवाल पूछे जाए
हां, मगर किससे? कैसे?
और क्यों पूछे जाए??
हर इक पे सवाल है
जानें किस बात का बवाल है
है कुछ खून में गर्माहट तो
ख़ामोश रहने का मलाल है..
बदन कपकपा रहे है
पूछने से पहले..
क्या पता काट दिए जाए धर
पूछने से पहले...
जुबां "शाहरुख" बन गया है
सवाल "किरण"
और हम खुद "सवाल" बन गए है
सवाल पूछने से पहले...


