नाम ऐसा किया कि वीरता नतमस्तक हो गई

त्याग ऐसा दिया कि सीता भी झुक गई

रक्त ऐसा बहा कि सुखी धरती भी रंजित हो गई

सौर्य ऐसा दिखाया कि तेरे बलिदान से कंधे झुक गई।


कुल के वंश खोने के बाद, उस पिता की ललकार सुने होगे

खो दिया जिस मां ने इकलौते लाल को, उसकी चीत्कार सुने होगे

सिंदूर मिटने के बाद, उस प्रिया की हुंकार सुने होगे

सदा के लिए राखी खुलने के बाद, उस बहना कि पुकार सुने होगे।


क्या बीजिंग वाले ऐसे टकराएंगे

"बिहारी" शब्द सुनकर कपकपाएंगे

गूंज बस तुम्हारी है शत्रु के मन में

युद्ध से पहले, तेरे खौफ से थार्राएंगे।

     ~ अमन