ऐसा नहीं है कि, हम पढ़ते नहीं लिखते नहीं
हां ये सच है कि, हम ज्यादा दिखते नहीं
क्या समझते हो सब बिकाऊ है
वसूल वाले भी है कुछ यहां, जो कभी बिकते नहीं
ज़माने के बोझ से जरा पीस गए है
हां लेकिन जरूरी नहीं की घिस गए है
अभी भी खून में है फौलादी जज़्बात
और कभी भी कर सकते है करिश्माई करामात
मेरा मक़सद नहीं हंगामे करना
बस चाहता हूं सन्नाटों के बीच कुछ कर गुजरना
समय अभी ठीक नहीं है, मौके आएंगे तो
चलाएंगे तीर
और सब खुली आंखों से देखेंगे बदलते
हमारी तक़दीर
आहिस्ता आहिस्ता मंजिल तक पहुंचेंगे
राह में पड़े ठोकरों को हटाते चलेंगे
व्याकुल है मन लेकिन हम बेचैन नहीं
सफल हो जाए हम, फिर भी हमें चैन नहीं
~ अमन
