हां भैया ये ब्लॉक है

यहां के साहब शेरलॉक है,

पैसे खाने का शौक है,

खजाने में बड़ा सा लॉक है।


यहां मुखियाओं का जोड़ है

हां भइया, साहब से इनका गठजोड़ है

मिल बांट कर दोनों खाते है

जनता को आंखे दिखाते है।


चचा सुशासन की सरकार है,

अभी भैया राशन कि दरकार है,

जनता जाती है करने इनकी शिकायत,

क्या बताए भैया, साहेब ही करते है इनकी हिफाज़त।


इस महामारी में भी

ब्लॉक में मारामारी है

हम इत्ता लुटे, तुम कित्ता लुटे

ये प्रतियोगिता बस जारी है।


     ~अमन~