सीमेंट की दुनिया में
मिट्टी सा दिल ढूंढ रहे हो
एयर कंडीशन की ठंडी में
पेड़ की छाव ढूंढ़ रहे हो
अरे बेवकूफ हो तुम, खुद को संभालो जरा
पर्दे की दुनिया में किरदार असली
ढूंढ़ रहे हो
क्या सोच रहे हो?? सब कामयाब है
अरे नहीं, माफियाओं के आशीर्वाद के
कर्जदार है सब और तुम इन कायरों में
सरदार ढूंढ़ रहे हो
देखो चारो ओर अपने,
शोर ही शोर है, और तुम
इस शोर में ख़ामोशी
ढूंढ़ रहे हो।
सब मालिक है यहां
लेकिन मकान नहीं किसिका
और तुम इस अतिक्रमित शहर में
असली हकदार ढूंढ़ रहे हो।
ढूंढ़ते ढूंढ़ते खुद गुम हो जाओगे
सपने सपने रह जाएंगे और वक़्त
रहते नहीं समझे तो खुद भूल जाओगे
आखिर क्या ढूंढ़ रहे हो??
~ अमन


