यूं ही चलने दो जो चल रहा है
डर है लेकिन चंचल मन मचल रहा है
तुम्हें देखकर ठहर गए है सब
कुछ का तो दिल भी फिसल रहा है
तुम्हारे कजरारें आंखों पे हजार आंखें टकटकी लगाए हुए है
लेकिन हमारी तुम्हारी आंखों के बीच तो दिल का व्यापार चल रहा है..
पता है तुम्हारे पीछे आशिकों की लंबी कतार लगी हुई है
कमबख्त हमारा बदन भी उसी कतार में खड़े - खड़े कब से पिघल रहा है..
कितनो को तसल्ली बस इस बात से है कि तुम हमारी हो ही ना सकती
मयस्सर मालूम नहीं जालिम दुश्मन को, हमारा दिल तो तुम्हारे दिल से कबसे बेदखल चल रहा है..


