कोई डूबा है 
घमंड लहर में
कोई जगा है
अंधेर शहर में
सबकी अपनी अपनी
ब्यथा है
सबकी अपनी अपनी
कथा है, 
उलझा हुआ है आसमां
विचारों के ज़हर में
किस करवट 
क़िस्मत पलटे
हक़ीक़त से है
आबरू लूटे
अभी हवाओं में वबा 
का कहर है
आज़ादी फंसी है
बारूदों के नगर में.. 

~अमन