गुर्बत में ना साथ तुम रहे ना ये दुनिया
कहते थे हमेशा आसपास रहेंगे, लेकिन छोड़ अकेले चले गए ये दुनिया
बड़े जालिम लोग रहते है रे यहां
तुम तो कहते थे, सपने झूठे है और सच है ये दुनिया
सब कहते है हमसे तुम्हारे रिश्ते थे ही नहीं
हमारे सच पे यकीन ही न करती है तेरी ये दुनिया
किस अंधेरे में छोड़ गए हमें, किसके भरोसे रहे
तन्हा देखकर हमें नोचने को दौड़ती है तेरी ये दुनिया
चलो हम तो बंद कमरों में जिस्म बेचा करते थे
तुम कहां लेे आए हमें, यहां सरेआम इमान बेचती है तेरी ये दुनिया
सफेदपोश वाले मानुष के अंदर असुरो का जिस्म है रे
ये चमकती चकाचौंध रौशनी के पीछे, काली है रे तेरी ये दुनिया
तेरे बहकावे में हम बदनाम गलियां छोड़ आय है
बीच राह में गुम हो गए तुम,अब हमें कैसे रखेगी ये दुनिया


