ये जिंदगी जिसने दिए, हम उसके भी ना रहे

अब कैसे ख़ुद का भरोसा कर ले

पल पल बदल जा रहा है मन

किसके साथ जी ले और किसके साथ मार ले..


चंद लम्हों में ये सफर खत्म हो सकती है

आज है तो जीने की ज़िद कर ले

ताउम्र खफ़ा रहने से क्या हासिल होगा

अभी पास है तो मिलकर दूरियां कम कर ले..


हमको यकीं है की कल ना रहेंगे हम

हिसाब करने से पहले कुछ किताब तो पढ़ ले

कुछ पन्ने पढ़ने बाकी रह जाए तो क्या

ख़त्म करने से पहले शुरू तो कर ले..


चांद की रौशनी के बीच जुगनू बने है हम

इन आंखों से उस नूर का दीदार तो कर ले

इक रोज जाएंगे मिलने हम भी 

मगर उस आसमां को पाने से पहले

इस जमीं को तो अपने नाम कर ले...

~अमन