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अनकही


बातें जो अनकही थीहमनें दिल में सजा रखा था

जुबां जो कह न पायाहोठों ने उसे छुपा रखा था

नसों में जो तड़तड़ाहट हैसांसों की बेचैनी से

हमनें उसे काबू करना चाहापढ़ के कबीर की रमैनी से...

— अमन
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