बातें जो अनकही थीहमनें दिल में सजा रखा थाजुबां जो कह न पायाहोठों ने उसे छुपा रखा थानसों में जो तड़तड़ाहट हैसांसों की बेचैनी सेहमनें उसे काबू करना चाहापढ़ के कबीर की रमैनी से...
बातें जो अनकही थीहमनें दिल में सजा रखा था
जुबां जो कह न पायाहोठों ने उसे छुपा रखा था
नसों में जो तड़तड़ाहट हैसांसों की बेचैनी से
हमनें उसे काबू करना चाहापढ़ के कबीर की रमैनी से...