न जानें आज क्यों हम, ज़िन्दगी जीने से डरते हैं।
जो हमारा ना हुआ अब तक, उसे खोने से डरते हैं।
डरते हैं के खो ना जायें, हम दुनिया की भीड़ में।
डरते हैं के गुम हो जायेंगे, तेरे नसीब से।
मलाल है के वो ना दिल से हमको याद करते हैं।
न जानें आज क्यों हम, ज़िन्दगी जीने से डरते हैं।
डरते हैं के हम कमज़ोर हैं, ना जीत पायेंगे।
डरते हैं के हम लाचार हैं, क्या सीख पाएंगे।
मलाल है के हम खुद ही ना खुद से प्यार करते हैं।
न जानें आज क्यों हम, ज़िन्दगी जीने से डरते हैं।
डरते हैं के हँसते हैं, हम छुपकर ज़माने से।
डरते हैं के रौंदे जायेंगे, नज़रे उठाने से।
मलाल है के वो भी दागी है जो हम पर वार करते हैं।
न जानें आज क्यों हम, ज़िन्दगी जीने से डरते हैं।
डरते हैं ना बन जायें, तमाशा जिन्दगानी का।
डरते हैं क्या होगा अंत, मेरी इस कहानी का।
मलाल हैं के औरत हैं, ये सोच कर ही डरते हैं।
ये जाना आज क्यों हम, ज़िन्दगी जीने से डरते हैं।