इंसान के साथ ही जन्म लेती हैं ख़्वाहिशें
जैसे बचपन मे खिलौनों की ख़्वाहिश
जवानी में आज़ादी की ख़्वाहिश
या बुढ़ापे में जिंदा रहने की ख़्वाहिश
समयानुसार बदलती है ख़्वाहिशें
जैसे नीरस जीवन मे कभी मृत्यु की ख़्वाहिश
या कभी मृत्यु को देखकर जीवन की ख़्वाहिश
यदि दृढ़ हों तो इतिहास बना देती हैं ख़्वाहिशें
जैसे सिकंदर की विश्व विजयी होने की ख़्वाहिश
या शाहजहां की ताजमहल बनाने की ख़्वाहिश
हर संघर्ष और सफलता की जननी है ख़्वाहिशें
इंसान को कभी भगवान
तो कभी शैतान बना देती हैं ख़्वाहिशें
इंसान के जीवनकाल में कभी खत्म नहीं होती हैं
मृत्यु के साथ ही मरती हैं ख़्वाहिशें