दिल की आवाज़
मेरा दिल मुझे ही बार-बार आवाज दे,
खुद को तुम खुद ही के उमंग से नवाज ले।
कल के कई हैं आईनें,
आज का रख तु मायने।
डर से भरी जिन्दगी,
निडर बन के तु निकल।
तेरे जैसे बदन बहुत,
लेकिन अलग अंदाज दे,
खुद को तुम खुद ही के उमंग से नवाज ले।
अब तुझे कोई न रोक पाएगा,
जिन्दगी के दौड़ में खुशी के गीत गाएगा।
कहता है सब कोई, सिर्फ अपना बात सुन,
नया साल आ गया बना लें तु नया जुनून।
बना तु ऐसा दास्तां खुद, खुद ही नाज दे,
खुद को तुम खुद ही के उमंग से नवाज ले।
शिकवा, शरारतें, गलतियां अब नहीं,
कर ले जरा सा,एक साथ सब नहीं।
खुद के शिकायतें खुद ही से माज दे,
खुद को तुम खुद ही के उमंग से नवाज ले।
-आलोक रंजन


