●● रोटियां ●●
अभी-अभी कचरे पर
फेंकी हुई रोटियां
बयां कर रही है कि
भूख मिट चुकी है
किसी की
तृप्त और संतृप्त
हो चुका है कोई
जरूरत नहीं रही
अब उसे इस
साक्षात परमेश्वर की
वह पा चुका है वरदान
ऐश्वर्य और संपन्नता का
रोटी महज
एक व्यंजन है
भर है उसके लिए
जो बढ़ाती है शोभा उसके नाना प्रकार के
पकवान से सजे
थाल का
काश कि इसे
फेंकने से पहले
देख पाता वह
किसी गरीब का घर
जहां एक अदद रोटि को
तरस कर भूखा ही
सो चुका है कोई
दिनभर हाड़ तोड़
मेहनत करके भी
जो जुटा नहीं पाता
निवाला दो वक्त का….
अलका 'सोनी'
बर्नपुर, पश्चिम बंगाल।
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