प्रकाशनार्थ कविता


1) ** लालबत्ती **



सड़कों पर गुर्राती


नाक की सीध में


दौड़ती हुई गाड़ियां 


अपनी धुन में मस्त


रौंदती चली जाती न जाने


कितनी जिंदगियां,


उन्हें रुकने की कवायद 


करवाती है लाल बत्ती


उच्छऋंखल वाहनों को


अनुशाषित कर मार्ग बनाती है


सबके लिए


हक़ नहीं केवल इस पर


चमचमाती, महंगी कारों या


अपनी शक्ति में मदमाते 


भारी-भरकम वाहनों का,


यह सड़क है


मेहनतकश मजदूरों


और फुटपाथ पर सोने वाली 


जनता का भी,


ये सबक सिखलाती है


लालबत्ती !!


असमानताओं भरे इस


संसार को समानता का


पाठ पढ़ाती है लालबत्ती।





अलका 'सोनी' ,

बर्नपुर, पश्चिम बंगाल।


उपरोक्त रचना पूर्णतया मौलिक एवम स्वरचित है।