आज मेरे देश में गणतंत्र दिवस का मेला है,
पुरे देश में लोकतंत्र का जश्न फेला है।
फ़िर से तिरंगा लहराएगा,
फ़िर से हर मनुष्य दिल से राष्ट्रीय गीत गाएगा।
आज़ादी की जंग में खोए हैं हमने अपने बहुत से
बूढ़ों और जवानों को,
सुनी हैं हमने बहुत सी मां बेटियों की
''लौट आओ दुनिया छोड़ कर जाने वालों अपने घर को",
दर्द भरी पुकारों को।
बहुत से ज़ुल्म सहे हैं हमारे देशवासियों ने,
बहुत सो ने खोए हैं अपने घर मकान,
बाट दिया गया है देश को हमारे
टुकड़ों टुकड़ों में।
रहता है यहां हर धर्म का मनुष्य,
हिन्दू, मुस्लिम, सीख, ईसाई;
बोली जाती हैं यहां विभिन्न विभिन्न प्रिकर की भाषाएं।
पर फिर भी मेरे देश में मिल जुल कर मनाते है
ये गणतंत्र दिवस का महान त्योहार।
आज फिर मेरे देश में गणतंत्र दिवस का मेला है,
आज फिर पुरे देश में लोकतत्र फेला है।
~अलीना नासिर

