कहो अपनी अदृश्य फौजों से
चलाएं शब्दवेधी बाण
मारने के लिए नहीं
बस करने को आहत मन
क्षत विक्षत आत्मा
सक्रिय करों उन सारी शक्तियों को
जो हैं तुम्हारे नियंत्रण में
कहो उनसे करें निर्मम प्रहार
जो तोड़ सके आत्मविश्वास
करा सके अपराधबोध
जो कर सके विवश मैदान छोड़ने पर
घायल मन लेकर
खंडित विश्वास लेकर
क्षतविक्षत आत्मा लेकर
तुम रहो दूर
नेपथ्य से
इन सारे दृश्यों का अवलोकन करते
अपने हाथ साफ रखते हुये
अपना मन और आत्मा
दोनों निर्मल रखते हुये
आह क्योंकि तुम्हें हार स्वीकार नहीं
जीत की तुम्हे आदत है