ये दौर ऐसा है,बोलने पर खड़े होगें ही सवाल,
खामोशियों केभी यहां मतलब निकाले जायेंगें
जो बैठे हैं बिचारे चुपचाप घरों में अपने
नाम उनके भीअब सड़कों पर उछाले जायेंगें
जब शोर ही सच बन जाये तो सोचो जरा
कहां धीमें स्वरों में सच बोलने वाले जायेंगें
कभी फिर दे देना उनकी आंखों में ख्वाब नये
अभी तो ये बताओ,कब उन आंखों से आंसू सूखेगे ,कब उनके हलक में निवाले जायेंगें
कब उनके दिल में उभरे छाले जायेंगें
अनिल 17.09.2020

