ये दिल में जागते वीराने ,ये अपनों में छुपे बेगाने
ये भीड़ में भी उभरती तनहाई, न पूछो क्या सितम है।
ये दिल की बेचैनियां, ये बेकरारियां क्या जबाब है इस बात का
कि जिसे सब कुछ हासिल है उसे क्या दर्दो अलम है ।
कौन जबाब दे अब भला इन बेवजह सवालों का,कि लबों पर गर तबस्सुम है, तो बात क्या है कि आंख नम है।
न जाने कौन सुनता है मेरी हर बात,
न जाने कौन बढ़ाता है अपना हाथ मेरी जानिब
न जाने किसे बेइंतहा मुहब्बत है मुझसे
कैसे बताएं इस दिल को क्या-क्या वहम हैं।