मेरी खामोशियाँ हर दिन मुझे कुछ नये ख़याल देतीं हैं
मेरी जिंदगी हर दिन मुझे कुछ नये सवाल देती है
इतनी ठोकरों खाकर भी गर मैं टूटता और बिखरता नहीं तो
सिर्फ़ इसलिए कि बढ़ाकर हाथ अपने वो मुझको संभाल लेती हैं


मेरी खामोशियाँ हर दिन मुझे कुछ नये ख़याल देतीं हैं
मेरी जिंदगी हर दिन मुझे कुछ नये सवाल देती है
इतनी ठोकरों खाकर भी गर मैं टूटता और बिखरता नहीं तो
सिर्फ़ इसलिए कि बढ़ाकर हाथ अपने वो मुझको संभाल लेती हैं