मैं जानता हूं सही है तुमने 

प्रेम में कितनी ही पीड़ाएं

दुख और टूटन के किस दौर से तुम गुजरी हो

तुमने भोगा है कितना अकेलापन

यहां तक कि तुम्हारा शायद

विश्वास ही उठ गया था

प्रेम शब्द से

तुम्हारा हृदय कभी होता नहीं था

वापस उस पथ पग बढ़ाने का

कभी प्रेम अंकुर पुनः अपने जीवन में उगाने का

किसी कारण तुम्हारे जीवन मेंं

प्रेम शब्द का पुनर्प्रवेश

एक सुखद संयोग है

तुम अपने दुखों के आवरण से मुक्त हो जाओ तुम्हारे अधरों पर हो निर्मल हास

मैं कामना यहीं बस करता हूं

मैंने देखा जब तुम मुसकराती हो तो तुम्हारा

अप्रतिम सौंदर्य और मोती जैसे दांत

और भी निखर जाते हैं

तुम वैसे ही अधरों पर हास लिए

जीवन पथ पर बढ़ती रहो

मुझे है दृढ़ विश्वास

तुम्हारे लिये प्रारब्ध ने लिखे होगेंं तुम्हारे लिए 

कितने ही सुंदर स्वप्न

जिन पीडा़ओं से तुम पहले भी गुजरी हो

मैं चाहता नहीं तुम्हें भूले से भी उस पथ ढकेलना शायद तुम कुछ भी तो नहीं जानती मेरे बारे में संबंधों का निर्वाह इतना ही सहज होता

तो जीवन कितना आसान हो जाता

मैं नहीं चाहता तुम्हारे भीतर

फिर कुछ टूटे ,फिर तुम बिखरो

डूबों फिर कभी भी तुम

दुख और नैराश्य के अपार सागर में

मैं चाहता हूं

जीवन पथ पर तुम मुक्त पांव

अब नये स्वप्न बुनती चलो

तुम्हारे लिये बढ़ेंगे कितने हाथ

तुम चुनना स्वेच्छा से

अपना जीवन मीत

जीना जीवन अपनी शर्तों पर

ये किसी संबंध विच्छेद की

की घोषणा नहीं है

सब कुछ है पूर्ववत

मैं कहीं नहीं जाऊंगा

मै यहीं रह गीत रचूंगा

तुम्हारे लिये गाऊंगा

मैं मिलूंगा कभी तुमसे ,तुम्हारे सम्मुख आऊंगा

पर तुम अगर मेरी वजह से फिर टूटी या बिखरी

तो मैं ये सह न पाऊंगा

जितना मैने तुम्हें जाना है

तुम हो गहन आत्मविश्वास से भरी

एक मजबूत लड़की

जो जानती है अपना जीवन जीना

सुख पाना दुख पीना