वक़्त बदला राहें बदलीं चेहरे बदले कितने मंज़र बदल गये
इक साथ चले थे जाने कितने पर सबके सफ़र बदल गये
ये हकीकत है जिंदगी की जिन्होंने की थी शुरुआत साथ साथ
उनमें से कुछ पीछे छूट गये कुछ आगे निकल गये
उम्र भर सफ़र में कौन कहां साथ दे पाता है
कुछ साथी राहों में बिछड़ गये कुछ हमसफ़र बदल गये
कमजोर थीं जो कश्तियां ख़ुद बखुद डूब गईं
कुछ को लहरों में उठे भंवर निगल गये
वो जिनको बहुत शौक था इंकलाब की राहों पर चलने का
वक़्त आने पर उस राह से मुड़कर कतरा के निकल गये
दिल के आईने में जब लगा अपना ही अक्स कुछ अजीब सा
ख़ुद तो न बदले ज़रा भी पर घर के आईने सारे बदल गये
ज़रा देख भालकर चलना यहां नक़ली चीजों की पूछ है बहुत
असली तो देखते ही रहे जाने कितने खोटे सिक्के यहां चल गये