लम्बी थकान भरी
ऐसी अनिश्चित यात्राओं से गुजरना
जिसमें कदम कदम पर
आपके सहयात्रियों का साथ, उनका हाथ
छूटता जा रहा हो
एक पीड़ादायी अनुभव है।
जीवन की निर्मम अनिश्चितता
जब सामने प्रश्न के रुप में खड़ी हो ,
कितने जीवनों को असमय मिटते देखने की
एक असहाय विवशता हो ।
तब ऐसी ही कठिन यात्राओं में
हमें पता चलता है कि . ... .
दूसरों के साथ चलने का क्या अर्थ होता है।
यात्रा के कठिन मोंड़ों पर
एक दूसरे का हाथ थामकर
संभालने का मतलब क्या होता है।
क्या होता है अर्थ -
थककर टूटकर साथ विश्राम का,
पीड़ा की घड़ियों में
एक दूसरे के आंसू पोछने का,
थके पांवों को सहलाने का,
एक दूसरे के जख्मों पर
मरहम लगाने का,
एक दूसरे का संबल बन जाने का ।
तब ही तो
हमें समझ आता है ये कि
सुख में, सामान्य स्थितियों में
हम चाहे जैसे रहें,चाहे जैसे जिएं
किसी से कोई संबंध रखें न रखें
जितना चाहें भोग लें अपना एकांत
पर दुख की ,वेदना की
असहाय विवशताओं के कातर क्षणों में
हमें चाहिए ही होता है
औरों का साथ, थाम लें ऐसे हाथ,
सर रखकर रो सकें ऐसे कंधे, और
औरों का सहारा
हम चाहे अपने मुंह से कहें न कहें
भले ये सत्य स्वीकारें या न स्वीकारें।

