ये एक दूसरे से नफरतें,ये दिलों के अंधकार 

ऐसे तो मेरे दोस्त हर्गिज़ न मिट सकेगें

गर भर सके इन दिलों मे बेपनाह प्यार 

और रुह में उजाले तो शायद बात बने

   अनिल 16.08.2020