जिन दुखों के हैं कारणहैं सम्भव उनका निवारण ।पर जो दुख उपजे अकारणउनका हो कैसे निवारण।
जिन दुखों के हैं कारणहैं सम्भव उनका निवारण ।
पर जो दुख उपजे अकारणउनका हो कैसे निवारण।