वो निगाहों से देता है बोसे
निगाहों ही से चोट पहुंचाये है।
निगाहों से करे है बातें सारी
निगाहों से सौ चुप लगा जाये है।
निगाहों से ही दूर भेंजे
निगाहों से ही पास बुलाये है।
निगाहों से ही दे कितनी उलझनें
निगाहों से ही सब उलझने सुलझाये है।
निगाहों से गिराता है बिजलियां
निगाहों से झरने बहाये है।
निगाहों से चुभोए है नश्तर
निगाहों से ही मरहम लगाये है।
निगाहों से इक पल में अपना बना ले
निगाहों से ही ठुकराये है ।
निगाहों से बसा दे इक दुनिया
निगाहों से वही दुनिया उजाड़ जाये है।
निगाहों से ही लड़े जंग
निगाहों से प्यार के पैगाम बरसाए है।
निगाहों से चलाये है तीर
निगाहों से कलेजा चीर जाए है।
निगाहों से मुस्कराए
निगाहों से ही अश्क बहाये है।
निगाहों से दिखाए है नासमझी
निगाहों से ही भेद गहरे समझाये है ।
निगाहों में डुबोये ऐसे की उभरने न दे
निगाहों से ही पार लगाये है।
निगाहों में भरे है सागर
निगाहों में आस्मां उतार लाये है।
निगाहों से करे दोस्ती
निगाहों से ही दुश्मनी भी निभाये है।
निगाहों से दिखाए पतझर
निगाहों से ही बहार भी लाये है।
निगाहों से छीन ले जाने क्या क्या
निगाहों से ही सब कुछ लौटाये है।
न जाने उसने कहां से सीखा ये फन
न जाने उसको ये जादूगरी कैसे आये है ।