कुछ रंग नये हैं मेरे अरमानों के
अब कदमों से मंजिल दूर नहीं।
अब कोई जीवन में बंधन नहीं
अब पांवोंं में कोई जंजीर नहीं।
उतार फेंका मैनें दुखों का चोला
सुख मेरी पहुंच से अब दूर नहीं।
मेरे गीतों में अब कुछ नये स्वर गूंजेंगे
पुराने रागो पर सृजन अब मुझे मंजूर नहीं।

