डूबती हुई सांसों में छुपे हुए कुछ स्वर,

थके हुए मगर

जीवन की गरिमामयी आभा से ओतप्रोत

कभी कुछ मौन से ,कभी कुछ बोलते,

धुंधलाती स्मृतियों से लाते,

ढूंढ़कर कोई बीता हुआ किस्सा ,

भरा हुआ कितने ही भावों से,

दोहराते हुए ,चमकने लगती हैं आंखें ,

कांपने लगती है आवाज,

मन लौट जाता है ,

पार कर समय की सीमाओं को,

जीवंत हो उठते हैं दृश्य सब पुराने ,

जी उठते हैं खोये सब संगी साथी ,

भोगे दुख तबके नम कर देते हैं 

अब भी आंखें ,

विह्वल कर देते हैं हर्ष के बीते हुए पल।

जाग उठते हैं बीते हुए स्वप्न,

उन वीथिकाओं में

भटकने लगता है मन

जहां कभी चले थे पांव।

आह बीते हुए समय में लौटना 

कितना अच्छा लगता है।

कई बार बीते हुए दुख की स्मृतियां

वर्तमान में देकर जाती हैं सुख कितना।