तुम्हें याद रखने के सौ कारण हैं मेरे पास
तुम बताओ एक भी कारण कि क्योंं मैं तुम्हें भूल जाऊं।
तुम गये जीवन से मेरे निर्णय तुम्हारा था
कारण तुम्हारे थे ,प्रश्न उठाया कब मैंने कोई
तुम्हारे दिये प्रेम से भरी हुई है झोली मेरी
मन है तृप्त अब तक मेरा
मैं जीवन भर लुटाऊं इस प्यार को ,
तो भी न कभी रिक्त हो पाऊं
फिर तुम ही कहो भूलकर इसे
मैं कैसे और क्यों पुनःअधूरी और अतृप्त हो जाऊं।
तुम्हें याद रखने के सौ कारण हैं मेरे पास
तुम बताओ एक भी कारण कि क्यों मैं तुम्हें भूल जाऊं।
क्यों न मैं बिताऊं शेष अपना जीवन
तुम्हारे दिये प्रेम के संग
तुम्हारी स्मृतियों से रंग भरती जीवन मेंंक्यों मैं किसी अनजाने पथ पर अब एक भी पग बढ़ाऊं।
तुम्हें याद रखने के सौ कारण हैं मेरे पास
तुम बताओ एक भी कारण कि क्यों तुम्हें मैं भूल जाऊं।
क्या तुम्हारे जैसा फिर मुझे कोई मिल पायेगा
खिला था जैसे हृदय मेरा ,फिर वैसे खिल पायेगा
भरोसा क्या इस बात का कि न मुरझायेगा
क्यों मैं किसी नयी प्रीत की ओर जाऊं
मैं क्यों एक भी पल व्यर्थ गवाऊं।
तुम्हें याद रखने के सौ कारण हैं मेरे पास
तुम बताओ एक भी कारण कि क्यों मैं तुम्हें भूल जाऊं।

