उम्र तो अक्सर दिखाती है आईना मुझे 

मगर नादां दिल पालता है कितनी हसरतें नई।

 दिल में उभरते हैं सौ खयाल 

मगर जुबां को आदत सी है खामोशी की।


2. तुम्हें आरजू है मुझसे लफ्ज़ों की

मैं चाहता हूं तुम पढ़ लो खामोशियां मेरी।


मेरे कानों तक आती है तुम्हारी सदाएं

क्या तुम्हारे कानों तक पहुंचती नहीं सरगोशियां मेरी।