मंजिल पर पहुंचें जब कदम, तो हार गले में आयापर देखे किसने लहूलुहान पांवों में चुभे कांटे।अकेले में अश्क बहा लेते हैंकितने दिन हो गये अपना दुख दर्द किसी से बांटे।
मंजिल पर पहुंचें जब कदम, तो हार गले में आयापर देखे किसने लहूलुहान पांवों में चुभे कांटे।
अकेले में अश्क बहा लेते हैंकितने दिन हो गये अपना दुख दर्द किसी से बांटे।