हवाओं में लहराती शाखों को शाय़द ये बिल्कुल भी इल्म नहीं

जड़ें कितनी गहरी चली गई हैं ज़मींन में,उन्हें ऊपर उठाने के लिए

तुम भी देना उनको सहारा बुढ़ापे में ,जो ऊंगली थामकर साथ

चले थे बचपन में तुम्हारे, तुमको चलना सिखाने के लिए

बनाने में वक़्त लगता है पर,टूट कर बिखर जाते हैं रिश्तेपल भर में

कितना कुछ तो करना पड़ता है हर एक रिश्ता निभाने के लिए

सहेज कर रखना जो भी तुम्हारी ज़िंदगी में मीठी यादें हैं

तल्खियों को भूल जाना तल्खियां कब होतीं हैं गले लगाने के लिए

कभी कभी यूं ही बेवजह दोस्तों के पास चले जाना मदद मांगने

ये तरीका भी ठीक होता है वक़्त बेवक्त उन्हें आजमाने के लिए