
हवाओं में लहराती शाखों को शाय़द ये बिल्कुल भी इल्म नहीं
जड़ें कितनी गहरी चली गई हैं ज़मींन में,उन्हें ऊपर उठाने के लिए
तुम भी देना उनको सहारा बुढ़ापे में ,जो ऊंगली थामकर साथ
चले थे बचपन में तुम्हारे, तुमको चलना सिखाने के लिए
बनाने में वक़्त लगता है पर,टूट कर बिखर जाते हैं रिश्तेपल भर में
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