किस कुल में जन्में

ये अधिकार कहां मनुष्य के बस में अपने 

क्यों उसकी हो पहचान

मात्र बस इस बात से ही

कि वो जनमा किस मां-बाप के घर

उसके नाम के आगे क्या लिखा है सरनेम

क्यों इतनी विषमताएं

क्यों बरते जाते आज भी भेदभाव

पाले जाते दुराव -छिपाव

क्यों सहने पड़ते आज भी अन्याय

क्यों होता शोषण आज भी

क्यों न मिले सम अवसर

जो सहज प्राप्य औरों को 

क्यों टूटें सपने उनके

क्यों शिक्षा न हो उनके हिस्से 

क्यों न हो सम्मान

क्यों भोगने पड़े तिरस्कार

क्यों प्रतिभा जन्म से तौली जाये

क्यों जाये आज भी धिक्कारी

क्यों रहे तिरस्कृत और हारी

सम शिक्षा

सम अवसर

सम सम्मान ,

उन्नत ग्रीवा

उन्नत अभिमान

आयेंं सबके हिस्से

चाहे जिस भी कुल में हो जन्मा कोई भी इंसान