न तुम्हारी निगाहों में कभी उभरा मेरा चेहरा
न तुम्हारे लबों पर कभी आया मेरा जिक्र
हम यूं ही गुजारते रहे जिंदगी तेरे इश्क के भरम में
मांगते रहे दुआएं तेरे लिए उम्र भर करते रहे तेरी फिक्र


न तुम्हारी निगाहों में कभी उभरा मेरा चेहरा
न तुम्हारे लबों पर कभी आया मेरा जिक्र
हम यूं ही गुजारते रहे जिंदगी तेरे इश्क के भरम में
मांगते रहे दुआएं तेरे लिए उम्र भर करते रहे तेरी फिक्र