कुरुप होते जा रहे
समय में भी
जीवन का सौंदर्य
बचा हुआ है
उन लोगों के कारण
जिन्होंने अपने दुख
अपनी कठिनाई में भी
सहेज कर रखी है
अपने भीतर
अपने विश्वास
अपनी आशाएं
अपनी मनुष्यता
अपनी कोमलता
अपनी संवेदनशीलता
जो हर खींचीं हुई रेखा को
जो बांटतीं है
मनुष्य को मनुष्य से
लांघते रहते हैं
चुपचाप
बिना कोई शोर मचाए