वो आज भी
अभी भी वही हैं
अंतर मात्र इतना है कि
कल केंद्र में थे
आज,अब - हाशिए पर हैं
कल जब वो कहते थे
सब सुनते थे
संसार सुनता था
कान लगाकर
वो आज भी कहते होंगे
वह आज भी सुनते होंगे
वह आज भी सोचते हैं
मगर उनके कहने - सुनने -सोचने से
अब किसी को
कोई अंतर नहीं पड़ता
उनका कहा कोई नहीं सुनता
वो अब भी वही हैं
पेड़ से टूटे हुए
शाख पे अटके
उस पत्ते की तरह
जो बस गिरा नहीं
वो भूल जाते हैं
अपना वर्तमान
वो भटकते रहते हैं
अपने अतीत की
गौरवशाली पगडंडियों में
अपने को केंद्र में देखते हुए
अपना स्वर्णिम अतीत ढूंढ़ते हुए