तुम्हारी स्मृतियों में घोलकर

तुम्हारी उदासियां

विरह की पीड़ाएं

वो कुछ बातें जो कह न पाए

वो भावनाएं जो जता न पाए

सब मिलाकर

कुछ तुम्हारे ,कुछ अपने शब्दों से

रच देता हूं कोई गीत

जानता हूं हम मिले न मिलें

पहुंचेगें ही गीत मेरे

तुम्हारे कानो तक

तब तुम इतना तो समझ ही जाओगी

कि मेरे हर गीत में तुम समायी हो