जो चल रहे हैं थके हारे पथो पर,क्या और विकल्प है पास उनके चलने के सिवा?
चल रहे हैं वो मगर, पांव उनके बिल्कुल अनमने हैं।
शांति के श्वेत ध्वज जिनके हाथों में है फहराते, जो शांति हेतु श्वेत कपोत हैं उड़ाते
हथियारों के सौदागर वही,हाथ उनके ही निर्दोषों के रक्त से सने हैं।
इस युग की वेदना यही, सत्य उनके कदमों में है नतमस्तक
जो चल रहे हैं दर्प से,जिन्होंने पथ असत्य के स्वेच्छा से चुने हैं।
जो कहते हैं नहीं उनके पास कुछ भी छिपाने को, घर उनका खुला है
पर लौह द्वार उनके घरों के, उनकी खिड़कियों पर अपारदर्शी पर्दे तने हैं।
वो तमाशे करेगें,हम तमाशाई बने रहेंगे,वह बजाते रहेंगे हम बजते रहेंगे
किसी ने सच कहा है हम कल भी झुनझुने थे ,हम आज भी झुनझुने हैं।
पुरानी बातें हैं, कौन पूछता है,कौन जानता है जड़ों की गहराई को?
इन दिनों जो तने हैं, पूछ उन्ही की,वही देते दिखाई,वही गर्व से तने हैं।