जो औरों का है, उस पर ,

अपना अधिकार जमा लेना

जो कल गैर थे ,बेगाने थे

उनको सहज भाव से अपना लेना।

अपनी कही कुछ भूल जाना ,

उनकी कही कुछ भुला देना

बदली हुई कितनी फिजायें हैं

कितना बदला -बदला सा मौसम है।

किसके आने की आहटों से

बढ़ी हुई है और,और भी बढ़ जायेगी

सरगर्मी उन गलियों में भी

आज जहां खामोशी का आलम है।