कुछ चिठ्ठियां

प्रेम में ,उदासियों में डूबी हुई

आंसुओं से भीगी

लिखीं गईं अस्पष्ट अक्षरों में

उनमें उड़ेलीं गईं मन की सारी भावनाएं

कहा गया कितना कुछ

दिये गये कितने उलाहने

जताया गया कितना प्रेम

की गईं कितनी ही प्रार्थनाएं 

बंद भी की गईं वो सुंदर लिफाफों में

पर कहीं पहुंच न पाईं

क्योंकि उन लिफाफों पर

कभी पते न लिखे गये।