कोई कारवां तुझे मिले न मिले
कोई साथ तेरे सफर में चले न चले
निगाहों में तेरे कोई ख्वाब पले न पले
दिल तेरा सोयी चिंगारियों से जले न जले
रुह के पैबंद तेरे सिले न सिले
जिस्म के दर्द तेरे पिघलें न पिघलें
कदम बस तेरे चलने चाहिए ।
कुछ आवारा से खयाल
दिल में मचलने चाहिए
जहां को दिखे न दिखे कोई फर्क नहीं पड़ता
तेरे मन मेंं कुछ चिराग
रोशनी के हमेशा जलने चाहिए ।

