मैंने पूछा चांद से क्या बात है कि

तुम हो सौन्दर्य के मापदंड

आजतक बने हुए, कल की बात और थी

जब हम दूर से देखा करते थे

तुमको और नहीं जानते थे कुछ भी

कभी रहा होगा तुम्हारा आकर्षण

क्योंकि हमें पता नहीं था तुम हो कैसे

अब तो हमें पता है कि गड्ढे हैं

तुम्हारी सतह पर हैं दाग कितने

हो तुम ऊबड़ खाबड़

पर फिर भी शायद

तुम्हारा दूर से दिखता उजला चेहरा

हमें मोह लेता है

क्योंकि अब भी हमने बदले नहीं

अपने सौंदर्य मापदंड ,

बिकती हैं आज भी चेहरा गोरा करने की क्रीम

ढूंढते हैं आज भी लोग

बेटों की शादी के लिए गोरी लड़कियां

थोड़ा हीनभाव से देखते हैं काले लोगों को

होता है अब भी भेदभाव

दुनिया में गोरे और कालों में

जब तक होता रहेगा ऐसा

तुम पर हम लिखते रहेंगें कविताएं

करते रहेंगे अपने प्रिय का

सौंदर्य बखान तुमसे तुलना करके

मैं लिख रहा हूं इतना कुछ

पर ये स्वीकार करने में

मुझे जरा भी संकोच नहीं

मैं भी तुम्हारे प्रशंसकों में एक हूं

करता रहता हूं मैं भी

तुम्हारा इस्तेमाल अपनी रचनाओं में

तुम खुश रहो तब तक, जब तक

हम गढ़ नहीं लेते

सुंदरता के नये मानक

ढूंढ़ लेते कुछ और

अपनी उपमाओं के लिए