इस राह चल
उस राह चल
जहां चाह चल
मुक्त हो बंधनों से निकल
चल
हो हृदय विकल
हो क्लांत मन
या हो क्लांत तन
या हो पांवों में थकन
पर तू न विचल
चल
चल बियाबान में
चल गांव में
चल बाजार में
चल धूप में
चल छांव मे
चल शमशान में
चल
नयी राहपर
नयी आस लिये चल
रेगिस्तान में भी तूं
इक अधूरी प्यास
लिये चल
चल तूं चमन की बहारों में
इक दिल उदास लिए चल
रात के अंधेरों में चल
दिन के उजालों में चल
भंवर में चल
धार में चल
मंझधार में चल
नदी के तीर पर चल
सागर के बीच में चल
चल आंधी में चल
चल तूफान में चल
सीने में इक आग लिये चल
मन में जलती
मशाल लिए चल
अनदेखी अनजानी पगडंडियों
पर चलअपनों के मध्य
अपनों के साथ चल
यूं ही कभी
अनजानी राहों पर
अपरिचितों के साथ चल
चल तूं स्वप्न अपने सारे
अपने साथ लिए चल
अपना भाग्य अपने
हाथ लिये चल
जीता रह जीवन
पर अंतर में कहीं
मृत्यु अपने साथ लिए चल
है जब तक
सांस चल रही
चल
बिन थके बिन रुके
चल
अनिल 21.09.2020