उम्र का अब होने लगा है असर दूर के साए

और पास के अक्षर धुंधले नजर आने लगे हैं

उंगलियां रह रह के कंपकंपाती हैं

हाथ भी अब थरथराने लगे हैं

चलने में लगती है अक्सर ठोकर

पांव भी अब तो लड़खड़ाने लगे हैं

उम्र भर जो चले थे साथ वो दोस्त

एक एक कर साथ छोड़ जाने लगे हैं

बड़ा सा घर सूना सूना सा

खाली खाली सा लगता है

बाहर रहने वाले बेटे नाती पोते

रह रह के याद आने लगे हैं

अक्सर रातों को नींद ठीक से आती नहीं

इक हल्की सी आहट से भी घबराने लगे हैं

घर संभालें नहीं संभलता अब तो

चीजें भी रखकर कहीं भूल जाने लगें हैं

बच्चों के फोन का बस करते रहते हैं इंतजार

अल्बमो की तस्वीरों से अब तो दिल बहलाने लगे हैं

उम्र के इस मोड़ पर कहीं बिछड़ न जाए हमसफ़र

अब तो ये ग़म भी सताने लगे हैं