एक तीव्र भूकम्प आता है

रख देता है सब कुछ उथल-पुथल कर

पल भर में धराशायी हो जाती हैं

गगनचुंबी इमारतें

मच जाती हैं

चीख पुकारें

शव दबे रहते हैं मलबों में

घायल लोग दबे रहते हैं मलबों में

कई दिनों तक लोग निकाले जाते रहेंगे

इन्हीं ध्वस्त अवशेषों से।

एक भी बचे जीवन की संभावना

खींचती रहेगी राहत कार्यों को,

पर कुछ दिनों बाद

सब कुछ

सामान्य और पूर्ववत हो जायेगा

लोग भूलने लगेंगे विध्वंस ।

जिन के घर नहीं गिरे

जिनका कोई प्रिय नहीं मरा

जिनका कोई अपना घायल नहीं हुआ और

वो भूल जायेंगें पूरी तरह

कभी -कभी कहानियां भी सुनायेगें

एक अलग तरह के स्वर में

कि वो साक्षी थे

धरती में ऐसी उथल-पुथल के।

पर, जिनके गिर गये घर,

जिन्होंने खो दिया किसी अपने को

जिनका कोई अपना हुआ घायल

जो भूल नहीं पायेंगे

अपने खोने के दुख

वो नहीं सुनायेंगे

कभी कोई कहानी,

बल्कि हर कहानी को सुनकर

बहा देंगें चुपचाप दो आंसू।