कई बार कुछ रास्तों से गुजरते हुए
मुझे अक्सर ये भ्रम हो जाता है कि
बहुत सी आवाजें मुझसे मुखातिब़ हैं
कुछ चेहरे मुझसे बोल रहे हैं
कुछ शब्द जैसे कहे गये हैं मेरे ही लिए
अनजान, नितांत अपरिचित लोगों की आवाजें
अलग -अलग स्वर अलग -अलग भाव लिए
वो चेहरे, वो आवाजें वो भ्रम धीरे -धीरे
बन जाते हैं जीवन का एक जरूरी हिस्सा
जीवन के सारे भाव जीता हूं मैं
अपने ही बुने हुए इस भ्रमजाल में
ऐसे भ्रम जिनके टूटने से न हो
कुछ खास दुख या पीड़ा
क्योंकि ये कहकर सांत्वना दे सकते हैं मन को
समझा सकते हैं
आखिर हमने भ्रम ही तो पाले थे