सीने में दर्द के सैकड़ों समंदर लिये जी गयानिगाहों से जो बहने को बेताब थीं नदियांलबों के तबस्सुम में घोलकर पी गयाहकीकत से तो खत्म ही हो जाता फसाना सारातेरे इश्क के झूठे भरम में चंद रोज और जी गया